Naxalites: माओवादी केंद्रीय समिति के प्रवक्ता के नाम से एक कथित पत्र महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों को भेजा गया है। इस पत्र में कहा गया है कि माओवादी बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण करना चाहते हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियाँ और पुलिस यह जाँच कर रही हैं कि यह पत्र असली है या नहीं।
पत्र में माओवादियों ने सरकार से बातचीत करने की इच्छा जताई है और कहा है कि वे शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कुछ समय के लिए हिंसा रोकने को तैयार हैं। उन्होंने सरकार से 15 फरवरी 2026 तक का समय देने की अपील की है, ताकि वे अपने कैडरों से बात करके अंतिम निर्णय ले सकें।
पत्र में क्या कहा गया है?
Naxalites: माओवादियों ने यह भी अनुरोध किया है कि सरकार अपनी आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति को रेडियो, मीडिया और अन्य माध्यमों से दूर-दराज इलाकों तक पहुँचाए, ताकि जंगलों और दूरस्थ गांवों में रहने वाले सभी कैडर इस संदेश को ठीक से समझ सकें। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि सरकार एंटी-नक्सल अभियान, विशेष रूप से ऑपरेशन कागर (Operation Black Forest) को अस्थायी रूप से रोक दे।
सरकार ने क्या कहा?
छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि सरकार किसी भी ऐसे व्यक्ति या समूह से बातचीत के लिए तैयार है जो हथियार छोड़ना चाहता है। लेकिन सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि हिंसा जारी रहने के दौरान वार्ता नहीं हो सकती, और जो Naxalites आत्मसमर्पण नहीं करेंगे, उनके खिलाफ अभियान जारी रहेगा। केंद्र सरकार ने भी इसी रुख को दोहराया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद(Naxalites) को पूरी तरह समाप्त करना है और माओवादियों को या तो आत्मसमर्पण करना होगा या फिर कड़ी कार्रवाई का सामना करना होगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पत्र?
हाल के महीनों में सुरक्षा बलों ने कई बड़े अभियान चलाए हैं, जिनमें कई शीर्ष माओवादी नेता मारे गए हैं और बड़ी संख्या में कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है। इन अभियानों से माओवादी संगठन की शक्ति काफी कमजोर हुई है। इसी पृष्ठभूमि में माना जा रहा है कि यह पत्र दबाव की स्थिति में आया है और यह संगठन की बदलती रणनीति का संकेत भी हो सकता है।
अगर यह पत्र असली पाया जाता है, तो आने वाले समय में यह Naxalites माओवादी इतिहास का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण हो सकता है। हालांकि सरकार का संदेश स्पष्ट है – जो हिंसा छोड़ेगा, उसके लिए बातचीत के दरवाजे खुले हैं, लेकिन जो हथियार नहीं छोड़ेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई बिना रुके जारी रहेगी।


