मनीष मल्होत्रा की नई फ़िल्म Gustaakh Ishq कुछ पहले जैसा इन दिनों दर्शकों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है। रिलीज़ के कुछ घंटों के भीतर ही सोशल मीडिया पर इसकी तारीफ़ों की बौछार शुरू हो गई।
नसीरुद्दीन शाह, विजय वर्मा, फ़ातिमा सना शेख़ और शरीब हाशमी जैसे उम्दा कलाकारों की मौजूदगी ने फ़िल्म को और भी असरदार बना दिया है। गुस्ताख इश्क अपने नाम की तरह एक नफ़ासत भरा एहसास बनकर उभरती है।
इश्क़ का एहसास, रफ़्तार नहीं, यही है Gustaakh Ishq की खूबसूरती
आज के तेज़-तर्रार दौर में जहाँ कहानियाँ तेजी से आगे बढ़ जाती हैं, वहीं Gustaakh Ishq दर्शकों को रुककर प्यार महसूस करने का मौका देती है। यह वह मोहब्बत है जो धीरे-धीरे दिल में उतरती है, सांसों में ठहरती है और फ़िल्म खत्म होने के बाद भी मन में गूंजती रहती है। दर्शक इसे पुराने दौर की मिठास वाली प्रेम कहानियों जैसा अनुभव बता रहे हैं।
सोशल मीडिया पर छाया #MustWatch, बढ़ी गुस्ताख इश्क की चर्चा
ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर फ़िल्म की खूब चर्चा हो रही है। दर्शक Gustaakh Ishq को “दिल छू लेने वाली”, “सुकूनभरी”, और “पुराने इश्क़ की याद दिलाने वाली” बता रहे हैं। गुलज़ार साहब के गीतों ने अनुभव को और गहरा बना दिया है। कई यूज़र्स का कहना है कि हर गाना शायरी की तरह दिल में उतरता है, और संगीत फ़िल्म के एहसास को और भी खास बनाता है।
कहानी, संवाद और शायरी; गुस्ताख इश्क का दिल
Gustaakh Ishq सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि एक एहसास है। इसकी कहानी सरल होने के साथ-साथ गहरी भी है। संवादों और शायरी में पुरानी शैली की मिठास है, जो आज की फिल्मों में कम देखने को मिलती है। दर्शकों ने शायरी को फ़िल्म का “अदृश्य किरदार” बताया है, जो पूरी कहानी में बहती रहती है।
अभिनय की परतें और दमदार केमिस्ट्री
फ़िल्म समीक्षकों ने भी Gustaakh Ishq की जमकर तारीफ़ की है। विजय वर्मा और फ़ातिमा सना शेख़ की कोमल केमिस्ट्री दर्शकों को अपनी ओर खींचती है। नसीरुद्दीन शाह अपनी उपस्थिति से कहानी में गहराई और वजन जोड़ते हैं, जबकि शरीब हाशमी अपनी सहज अदाकारी से दिल जीत लेते हैं। एक प्रमुख समीक्षक ने इसे “आज की पीढ़ी का मुग़ल-ए-आज़म” तक कहा है।
तेज़ रफ़्तार दुनिया में एक खूबसूरत ठहराव, यही है गुस्ताख इश्क
चैट, टेक्स्ट और रील्स की दुनिया में Gustaakh Ishq एक ऐसे प्रेम-पत्र की तरह महसूस होती है, जिसे पढ़ते हुए दिल कुछ पल ठहर जाता है। फ़िल्म यह याद दिलाती है कि प्यार हमेशा शोर में नहीं होता; अक्सर वह खामोश पलों में मिलता है, जिनकी गूंज लंबे समय तक दिल में रहती है।
स्टेज5 प्रोडक्शन की प्रस्तुति और शानदार निर्देशन
स्टेज5 प्रोडक्शन के बैनर तले मनीष और दिनेश मल्होत्रा द्वारा निर्मित Gustaakh Ishq में निर्देशक विभु पुरी ने पुराने दौर की सौम्यता और आधुनिक भावनाओं को बेहद खूबसूरती से जोड़ा है। लोकेशन्स, सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर दर्शक को फ़िल्म की दुनिया में पूरी तरह खींच लेते हैं।
बॉक्स ऑफिस पर मजबूत शुरुआत
पहले वीकेंड में ही Gustaakh Ishq ने सिनेमाघरों में अच्छी पकड़ बना ली है। शाम और नाइट शोज़ में दर्शकों की भीड़ दिखाई दे रही है। पारिवारिक दर्शक भी फ़िल्म को खूब पसंद कर रहे हैं।
निष्कर्ष: Gustaakh Ishq पुरानी मोहब्बत की नई धड़कन
कुल मिलाकर, गुस्ताख इश्क कुछ पहले जैसा एक ऐसी फ़िल्म है जो आज की पीढ़ी को पुराने इश्क़ की नज़ाकत से दोबारा मिलाती है। यह सिर्फ एक फ़िल्म नहीं, बल्कि एक एहसास है। एक ऐसा सफ़र जहाँ प्यार शोर से नहीं, खामोश पलों से लिखा जाता है। Gustaakh Ishq दर्शकों को वह एहसास फिर से कराता है जिसे लोग आज खो चुके थे।


